Uttarakhand

देवभूमि के मदरसों से उठेगी हरियाली की गूंज: “माँ के नाम एक पेड़” अभियान…

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के पावन अवसर पर उत्तराखंड से सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रकृति संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आने वाली है। ‘उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड’ ने इस बार पर्यावरण दिवस को एक बेहद भावनात्मक और व्यापक अभियान के रूप में मनाने का फैसला किया है। बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी के नेतृत्व में राज्य के सभी पंजीकृत मदरसों में “माँ के नाम एक पेड़” अभियान के तहत एक विशाल वृक्षारोपण (Plantaion) कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

मातृ सम्मान से जुड़ेगा प्रकृति का संरक्षण: मुफ्ती शमून कासमी
इस अनूठे और बेहद संवेदनशील अभियान का मुख्य उद्देश्य न सिर्फ देवभूमि के हरित क्षेत्र (Green Cover) को बढ़ाना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान (माताओं के प्रति आदर) से जोड़कर समाज को एक गहरा भावनात्मक संदेश देना है। मदरसा बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इस महा-अभियान में प्रदेश के सभी मदरसों के छात्र-छात्राएं, उलेमा, शिक्षकगण (स्टाफ) और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराएंगे। इस अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने कहा:

“हमारे धर्म, संस्कृति और रवायतों में पर्यावरण और पेड़-पौधों के संरक्षण को बहुत ऊंचा और पवित्र दर्जा दिया गया है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर ‘माँ के नाम एक पेड़’ अभियान के माध्यम से हम न केवल धरती मां की रक्षा की कसम खाएंगे, बल्कि अपनी जन्म देने वाली माताओं के प्रति भी सम्मान और दुआएं व्यक्त करेंगे। हर बच्चे द्वारा लगाया गया पौधा उसकी मां की ममता की तरह फले-फूलेगा।”

सीएम पुष्कर सिंह धामी के ‘पर्यावरण विजन’ की सराहना
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस अभियान के आयोजन के साथ ही उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर और ईमानदार प्रयासों की भी विशेष रूप से सराहना की गई। मदरसा बोर्ड ने साफ किया कि उनका यह व्यापक अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उसी सोच और विजन से प्रेरित है, जिसके तहत वे हमेशा ‘विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन’ की वकालत करते हैं।

मुख्यमंत्री धामी की प्रमुख पर्यावरण पहल:

उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर्व ‘हरेला’ को जन-आंदोलन का रूप देकर बड़े पैमाने पर पौधरोपण। जंगलों को आग से बचाने और नए जंगलों के संवर्धन के लिए विशेष जागरूकता। “वन, जल, वायु” संरक्षण: सीएम धामी का यह त्रिसूत्रीय विजन आज पूरे राज्य को प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित कर रहा है।

हरित और स्वच्छ उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का योगदान
मदरसा शिक्षा बोर्ड का मानना है कि इस तरह के जमीनी अभियानों से राज्य सरकार के ‘हरित और स्वच्छ उत्तराखंड’ के सपने को बड़ी मजबूती मिलेगी। कल (शुक्रवार) सुबह से ही प्रदेश के सभी जिलों में स्थित मदरसों के परिसरों और उनके आसपास खाली जमीनों पर छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाने का काम शुरू हो जाएगा। बच्चों को इन पौधों को सिर्फ लगाने ही नहीं, बल्कि उनके बड़े होने तक उनकी पूरी देखभाल करने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी

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